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Death

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  • Last Updated Feb 12, 2024

About This Course

मृत्यु : जीवन का अन्तिम सत्य  

"मानव जीवन, मृत्यु की ओर बढ़ने की, एक प्रक्रिया मात्र है " 


सारांश 

भाषा विज्ञान के अनुसार हर एक शब्द के अर्थ से एक भावनात्मक लगाव होता है, जो किसी व्यक्ति विशेष की अपनी दुनिया से बहुत गहरे अर्थों में जुड़ा होता है। 

यदि हम "ख़ुशी" शब्द को ही लें लें तो हमारा "अनुभव" सुखद होगा, यदि "दुःख" को लें लें तो हमारा "अनुभव" कुछ अच्छा नहीं होगा, और यदि हम "मृत्यु" शब्द को यदि कही पढ़ लें या सुन लें, तो हमारा "अनुभव" शत प्रतिशत यही होगा कि "ये क्या सुन लिया, अच्छा यह हो कि ना ही सुनना पड़े"। 

"मृत्यु" या "मौत" या "मरना" शब्द से हमारा भावनात्मक जुड़ाव इतना गहरा और इतना डरावना है कि, हमारी रूह भी अंदर से कांप जाती है। जब भी हम कभी बहुत बीमार होते हैं या किसी व्यक्ति को मरणासन्न अवस्था में देख लेते हैं, तो हमारा भय यही होता है कि कही हमको कुछ ना हो जाए, और यह हम सभी के साथ होता है, और इसलिए ही हम सभी अपने "जीवन" के प्रति काफी सचेत हो जाते हैं। 


 "कोरोमीन" का इंजेक्शन उसके ह्रदय की मांस-पेशियों में लगाते हैं, और कभी-कभी जीवन वापिस आ भी जाता है, तो यह भी एक उदाहरण है, कि उस व्यक्ति की मौत जो लगभग आने वाली थी, वो अब कुछ समय के लिए टल जाती है। 

उच्च तकनीकों के कारण लगभग यह संभव हो पाया है, कि हम मौत को मेडिकली कुछ समय के लिए दूर कर सकते हैं। उस व्यक्ति की मौत उसके लिए ऑप्शनल हो जाती है।

Course Instructor

Team member
Hiten Bhuta

Founder

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